International Journal of Advanced Research and Development

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International Journal of Advanced Research and Development
Vol. 2, Issue 3 (2017)

हिन्दी उपन्यासों में आँचलिकता का विकास


डाॅ0 जयराम त्रिपाठी

परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में परिवर्तन की नितान्त आवश्यकता है। परिवर्तन की अटूट शंृखला में सामाजिक परिवर्तन वर्तमान जीवन शैली का अद्वितीय पक्ष हैं मानवीय जीवन मे परिवर्तन होना, उसकी निरन्तरता का परिचायक/सूचक हैै। वर्तमान में भारतीय ग्रामीण सामाजिक चेतना में तीव्र गति से परिवर्तन दृष्टिगत होता है। यह परिवर्तन समयानुकूल/समय सापेक्ष है। वस्तुतः वैश्वीकरण के युग में बाजारवाद और संचार माध्यमोें मेें एक ओर जहाँ नगरों में द्रुतलय से परिवर्तन हो रहा है। वहीं भारतीय ग्रामीण सामाजिक संरचना में भी परिवर्तन के स्वर विद्यमान हैं।
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