International Journal of Advanced Research and Development


ISSN: 2455-4030

Vol. 3, Issue 5 (2018)

भारतीय राजनीति में गठबंधन सरकारों की अवधारणा : अल्पमत व गठबंधन सरकार में अन्तर

Author(s): सुनिता चौधरी
Abstract:
भारत एक संसदीय प्रजातान्त्रिक शासन व्यवस्था वाला राष्ट्र है। वर्तमान में बहुदलीय शासन व्यवस्था भारतीय राजव्यवस्था का प्रमुख लक्षण है। संसदीय शासन प्रणाली के अन्तर्गत सरकार बनाने के लिए लोकप्रिय सदन में किसी राजनीतिक दल का बहुमत होना आवश्यक है। जब किसी एक दल को बहुमत नहीं मिलने पर अनेक दल अपने संयुक्त बहुमत से संविद सरकार बना सकते है। 1989-2014 तक केन्द्र में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत प्राप्त नहीं हुआ। (2014 के आम चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ)। भारतीय राजनीतिक में राजनीतिक शुन्यता की स्थिति उत्पन्न होती जा रही है। अब तक केन्द्र व राज्य स्तर पर बनी संविद सरकारे ”असफल प्रयोग“ ही रही है। मिली-जुली सरकारों की सफलता के लिए जिस समझ, सुझबुझ, राजनीतिक परिपक्वता और संस्कृति की आवश्यकता होती हंै राजनीतिक दल उसे नहीं अपना पाए है। बहुदलीय व्यवस्था में एक दल की प्रधानता समाप्त हो गई है। सही और सम्पूर्ण अर्थो में कोई भी राजनीतिक दल अखिल भारतीय दल नहीं हैं। इन परिस्थितियों के परिणाम स्वरूप ”त्रिशंकु लोकसभा“ और “खण्डित जनादेश” की स्थिति उत्पन्न होती है।
भारतीय राजनीति सम्भावनाओं को खेल और परिस्थितियों पर निर्भर गतिशील कला है। भारत में बनी गठबन्धन व अल्पमत सरकारों के निर्माण ने भारतीय राजनीतिक नेतृत्व की कमजोरी को उजागर कर दिया। राजनीतिक नेतृत्व में राष्ट्रीय व्यक्तित्व की कमी होती जा रही है, भारत में अधिकाश गठबधन सरकारों के निर्माण में राजनितिक नेतृत्व की उच्च महत्वकांक्षा व स्वार्थों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। क्षेत्रीय नेतृत्व तथा धरती पुत्र के सम्प्रत्यय ने संविद सरकारों के निर्माण को बल प्रदान किया है।
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