International Journal of Advanced Research and Development


ISSN: 2455-4030

Vol. 5, Issue 1 (2020)

कबीर की उलटवाँसियों पर गोरखनाथ का प्रभाव

Author(s): डाॅ॰ सरिता चैहान
Abstract: हिन्दी साहित्य के इतिहास में मध्यकालीन निर्गुण संतों की वाणी में रहस्यात्मकता का गहरा पुट देखने को मिलता है। साम्प्रदायिक, साधनात्मक एवं वैचारिक अनुभूतियों की अभिव्यक्ति की दुरूहता के कारण इनकी वाणी में गुह्यता बढ़ती चली गई। संत कवियों ने अपनी रहस्यात्मक अनुभूतियों को विरोधात्मक प्रतीक योजना तथा सांकेतिक शैली के माध्यम से अभिव्यक्त किया। ऐसी गुह्यकृच्छ उक्तियों को उलटवाँसी शब्द से व्यवह्नत किया जाने लगा। कबीर द्वारा रचित उलटवाँसियों ने एक ओर परवर्ती संतों को बहुत अधिक प्रभावित किया तो दूसरी ओर कबीर स्वयं नाथांे विशेष रूप से गोरखनाथ की ‘उलटी चरचा’ से प्रभावित हुए।
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