International Journal of Advanced Research and Development

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International Journal of Advanced Research and Development
Vol. 2, Issue 5 (2017)

मध्यकालीन नाटकों पर आधारित जाति व्यवस्था: एक अध्ययन (बारहवीं एवं तेरहवीं शताब्दी)


सुरेन्द्र सिंह

जाति प्रथा पर साहित्य की कोई कमी नहीं है लेकिन इस पर बहुत कम काम हुआ है। जाति न केवल सिद्धान्त में उसके स्वरूप और कार्य प्रणाली पर बल्कि हर रोजमर्रे की जिन्दगी की भी हकीकत है। जाति न केवल सिर्फ धर्म है और न ही ये अकेले हिन्दुमत से ही सम्बन्धित है। यदि जाति उपाधिकारों के बारे में बात करें तो इसके नियमों को उच्च अधिकार वर्ग ने उपर से नीचे गिरा दिया। इसलिए कहा जा सकता है कि जितनी जाति प्रत्यक्षीकरण और कार्य के बारे में है उतना ही जाति विचारधारा और मूल्यों से भी जुड़ी है। ये सब एक दूसरे से जुड़े हैं। इसके अतिरिक्त जाति से सम्बन्धित वाद-विवाद, विरोध, तनातनी भी होती रहती है जाति समय और इतिहास का मुद्दा भी है। जाति-प्रथा की कार्यप्रणाली को हम नाटकों में वर्णित सामग्री के आधार पर देखेंगे।
Download  |  Pages : 880-882
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सुरेन्द्र सिंह. मध्यकालीन नाटकों पर आधारित जाति व्यवस्था: एक अध्ययन (बारहवीं एवं तेरहवीं शताब्दी). International Journal of Advanced Research and Development, Volume 2, Issue 5, 2017, Pages 880-882
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