International Journal of Advanced Research and Development

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International Journal of Advanced Research and Development
Vol. 2, Issue 5 (2017)

भारतीय राजनीति में महिला सहभागिता एवं राजनीतिक चेतना (राजस्थान की राजनीति के सन्दर्भ मेंः एक विश्लेषण)


डाॅ. पपली राम

लोकतांत्रिक शासन प्रणाली शासन का श्रेष्ठतम रूप है। इसका सार जनता की सहभागिता एवं नियन्त्रण में निहित है। यह महिला एवं पुरूष दोनो को उन्नति तथा उत्थान के समान अवसर प्रदान करती है। प्रथम स्वतंत्रता आन्दोलन के पश्चात् भारतीय समाज में बदलाव आया और महिला शिक्षा पर भी बल दिया गया। सरकार का बुनियादी दृष्टिकोण, सामाजिक क्षेत्र में कल्याणकारी नीतियों के तहत महिलाओं को लक्ष्य बनाने का रहा है। प्रथम पंचवर्षीय योजना से लेकर वर्तमान तक की योजनाओं में महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक स्तर को ऊॅचा उठाने तथा उन्हें राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए अलग से आर्थिक सहायता का प्रावधान भी किया गया। 20 वीं सदी में राष्ट्रीय महिला परिषद तथा अखिल भारतीय महिला संघ जैसी अनेक संस्थाओं का जन्म हुआ। 1926 तक सभी प्रान्तों में महिलाओं को सीमित मताधिकार और प्रान्तीय विधानसभा में चुनाव लडनें का अधिकार मिल गया। इससे महिलाओं में राजनीतिक जग्रति आई और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को बल मिला। स्वतंत्रता के पश्चात् सर्वप्रथम श्रीमती इन्द्रा गाॅधी का प्रधानमंत्री बनना, महिलाओं की सबसे बडी उपलब्धि रही। महिलाओं की राजनीति में सहभागिता बढाने के लिए संसद में महिला आरक्षण विधेयक भी लाया गया, लेकिन अभी तक वह पारित नही हो सका। इसके बावजूद भी प्रथम लोकसभा से 14 वी लोकसभा तक में महिलाओं ने अपनी सहभागिता दी है। राजस्थान विधानसभा में भी महिलाओं की सहभागिता एवं राजनीतिक चेतना के रूप में 1952 से 2013 के बीच हुए चुनावों में कुल 177 सीटों पर महिलाओं ने विजय प्राप्त की। जो की कुल सदस्य संख्या का 8.85 प्रतिशत है यह महिलाओं में राजनीतिक सहभागिता एवं राजनीतिक चेतना को दर्शाता है।
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डाॅ. पपली राम. भारतीय राजनीति में महिला सहभागिता एवं राजनीतिक चेतना (राजस्थान की राजनीति के सन्दर्भ मेंः एक विश्लेषण). International Journal of Advanced Research and Development, Volume 2, Issue 5, 2017, Pages 883-886
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