International Journal of Advanced Research and Development

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International Journal of Advanced Research and Development
Vol. 3, Issue 5 (2018)

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी : जीवनी साहित्य एवं उपन्यास साहित्य सृजन का अध्ययन


डाॅ0 समयलाल प्रजापति

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी साहित्य के विविध पक्षों में साहित्य संरचना की है। उनका साहित्य विशिष्ट वैविध्यपूर्ण एवं विपुल है। निबन्ध उपन्यास, आलोचना, काव्य सर्जना, साहित्येतिहास लेखन, जीवनी लेखन के साथ अनुवाद एवं सम्पादन के क्षेत्र में अप्रतिम एवं अविस्मरणीय कार्य उनके द्वारा हुआ है। उनका रचना संसार विपुल होकर भी गम्भीर है। आचार्य हजारी प्रसाद जी के चारों उपन्यास ऐतिहासिक है। इन चारों उपन्यासों में उनका सांस्कृतिक दृष्टिकोण निहित है। उनकी इन औपन्यासिक कृतियों को हम सांस्कृतिक इतिहास सम्बन्धी रचनाओं की संज्ञा प्रदान कर सकते हैं। आचार्य द्विवेदी जी सर्वत्र मानव हित को दृष्टि में रखकर, जीवन सत्य की बात करते हैं। यह बात दूसरी है कि उनके विचारों का स्रोत अतीत-वाड़ग्मय हुआ करता है लेकिन यह भी स्वीकार करना पड़ेगा कि उनका कथन वर्तमान से हमेशा संलग्न रहता है। उनके उपन्यासों को डाॅ. नामवर सिंह निबन्ध मानते हैं। इसका अर्थ यह होता है कि उपन्यास जैसी विशाल कलेवर रचना में भी द्विवेदी जी विचार श्रृंखला को बिखरने नहीं देते हैं। वे अतीत से वर्तमान को सम्बद्ध करके देखते हैं। ऐतिहासिकता की रक्षा करते हैं, संस्कृति की व्याख्या देते हैं परन्तु वे विचार क्रम को नहीं टूटने देते हैं। द्विवेदी जी के उपन्यासों में निरपवाद रूप से अंतिम समाधान भक्ति में निदर्शित किया गया है।
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डाॅ0 समयलाल प्रजापति. आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी : जीवनी साहित्य एवं उपन्यास साहित्य सृजन का अध्ययन. International Journal of Advanced Research and Development, Volume 3, Issue 5, 2018, Pages 48-50
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