International Journal of Advanced Research and Development

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International Journal of Advanced Research and Development
Vol. 3, Issue 5 (2018)

हिन्दी काव्य में प्रकृति चित्रण का समीक्षात्मक अध्ययन


डाॅ0 कंचनलता सिंह

वस्तुतः मनुष्य सौन्दर्योपासक प्राणी है। सौन्दर्योपासना द्वारा हम सुन्दर वस्तु के अस्तित्व को सार्थक कर अपनी ओर सम्पूर्ण विश्व के एकत्व की स्थापना करते है। सौन्दर्याेपासना ही विश्वव्यापी उपासना का मूल है। जिसके द्वारा मानव उस सौन्दर्य की झलक प्राप्त करने में समर्थ हो जाता है जिससे समस्त विश्व की रमणीय वस्तुओं की मनोहारणी सुन्दरता प्राप्त होती है तथा समष्टि और व्यष्टि के आदर्शों का मेल हो जाता है।
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डाॅ0 कंचनलता सिंह. हिन्दी काव्य में प्रकृति चित्रण का समीक्षात्मक अध्ययन. International Journal of Advanced Research and Development, Volume 3, Issue 5, 2018, Pages 98-100
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